The quick brown fox .. of Sanskrit!

I got this cool Sanskrit wordplay recently as a Whatsapp forward. Author of the original post is unknown. I have not verified the references. So please let me know if there are errors.

भाषा का चमत्कार

संस्कृत की विशेषता

(1) अक्षरों की क्रमबद्धता से बनती रोचक काव्य पंक्ति।

अंग्रेजी में THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER A LAZY DOG.

ऐसा प्रसिद्ध वाक्य है। अंग्रेजी आल्फाबेट के सभी अक्षर उसमें समाहित है।

किन्तु कुछ कमी भी है :-
1) अंग्रेजी अक्षरें 26 है और यहां जबरन 33 अक्षरों का उपयोग करना पड़ा है। चार O हैऔर A तथा R दो-दो है।
2) अक्षरों का ABCD… यह स्थापित क्रम नहीं दिख रहा। सब अस्तव्यस्त है।

सामर्थ्य की दृष्टि से संस्कृत बहुत ही उच्च कक्षा की है यह अधोलिखित पद्य और उनके भावार्थ से पता चलता है।

क: खगीघाङ्चिच्छौजा झाञ्ज्ञोSटौठीडडण्ढण:।
तथोदधीन् पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।

अर्थात्- पक्षीओं का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का , दुसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु।संहारको में अग्रणी, मनसे निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनार कौन? राजा मय कि जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं। ”

आप देख सकते हैं कि संस्कृत वर्णमाला के सभी 33 व्यंजनों इस पद्य में आ जाते हैं इतना ही नहीं, उनका क्रम भी योग्य है।

(2) एक ही अक्षरों का अद्भूत अर्थ विस्तार।

माघ कवि ने शिशुपालवधम् महाकाव्य में केवल “भ” और “र ” दो ही अक्षरों से एक श्लोक बनाया है।

भूरिभिर्भारिभिर्भीभीराभूभारैरभिरेभिरे।
भेरीरेभिभिरभ्राभैरूभीरूभिरिभैरिभा:।।

अर्थात्- धरा को भी वजन लगे ऐसा वजनदार, वाद्य यंत्र जैसा अवाज निकालने वाले और मेघ जैसा काला निडर हाथी ने अपने दुश्मन हाथी पर हमला किया। ”

किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल ” न ” व्यंजन से अद्भूत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल्य का प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने थोडे में बहुत कहा है:-

न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नाना नना ननु।
नुन्नोSनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नन्नुनन्नुनुत्।।

अर्थात् :- जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है।।

वन्देसंस्कृतम्।

Another one from Whatsapp, again anonymously written:

On the richness of vocabulary-

Elephant word has 4000 synonyms in Sanskrit. Here are some of them.
कुञ्जरः,गजः,हस्तिन्, हस्तिपकः,द्विपः,द्विरदः,वारणः,करिन्,मतङ्गः,सुचिकाधरः, सुप्रतीकः, अङ्गूषः, अन्तेःस्वेदः, इभः, कञ्जरः, कञ्जारः, कटिन्, कम्बुः, करिकः, कालिङ्गः, कूचः, गर्जः, चदिरः, चक्रपादः, चन्दिरः, जलकाङ्क्षः, जर्तुः, दण्डवलधिः, दन्तावलः, दीर्घपवनः, दीर्घवक्त्रः, द्रुमारिः, द्विदन्तः, द्विरापः, नगजः, नगरघातः, नर्तकः, निर्झरः, पञ्चनखः, पिचिलः, पीलुः, पिण्डपादः, पिण्डपाद्यः, पृदाकुः, पृष्टहायनः, पुण्ड्रकेलिः, बृहदङ्गः, प्रस्वेदः, मदकलः, मदारः, महाकायः, महामृगः, महानादः, मातंगः, मतंगजः, मत्तकीशः, राजिलः, राजीवः, रक्तपादः, रणमत्तः, रसिकः, लम्बकर्णः, लतालकः, लतारदः, वनजः, वराङ्गः, वारीटः, वितण्डः, षष्टिहायनः, वेदण्डः, वेगदण्डः, वेतण्डः, विलोमजिह्वः, विलोमरसनः, विषाणकः।

Reminds me of Eskimos having many names for snow. Will be interesting to find the Dhaatu (root) of each of these names and the etymology.

Magha was a great Sanskrit Poet and Author. He was an expert in writing a whole Sloka with one-two-three-four consonants. Here is just an example from his book Shishupala Vadha:-

In 144th stanza, he writes whole sloka with only one consonant.
दाददो दुद्ददुद्दादी दाददो दूददीददोः । 
दुद्दादं दददे दुद्दे दादाददददोऽददः ॥

(Translation:- Sri Krishna, the giver of every boon, the scourge of the evil-minded, the purifier, the one whose arms can annihilate the wicked who cause suffering to others, shot his pain-causing arrow at the enemy.)

Also, he was an expert in writing palindromes. He writes in 44th stanza:-

वारणागगभीरा सा साराभीगगणारवा । 
कारितारिवधा सेना नासेधा वारितारिका ॥

(Translation:- It is very difficult to face this army which is endowed with elephants as big as mountains. This is a very great army and the shouting of frightened people is heard. It has slain its enemies.)

This is unbelievable! –

Have you heard about any book which can give you different story when you read it from backward? Here is a book Sri Raghava Yadhaveeyam.

This book is written in such a way that you will enjoy the story of Rama when you read it in forward way while you will enjoy the story of Krishna when you read it from backward.

Forward:-
वन्देऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥

(Translation:- I pay my obeisance to Lord Shri Rama, who with his heart pining for Sita, travelled across the Sahyadri Hills and returned to Ayodhya after killing Ravana and sported with his consort, Sita, in Ayodhya for a long time.)

Backward:-
सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी मारामोरा ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देहं देवं ॥

(Translation:- I bow to Lord Shri Krishna, whose chest is the sporting resort of Shri Lakshmi; who is fit to be contemplated through penance and sacrifice, who fondles Rukmani and his other consorts and who is worshipped by the gopis, and who is decked with jewels radiating splendor.)

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Author: thisisnotrightwing

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